भावुक विदाइयों और विवादास्पद आर्काइव पुनर्व्याख्याओं के बाद, पेरिस फैशन वीक ऐसी कलेक्शनों के साथ आगे बढ़ा, जिन्होंने डिज़ाइनरों को प्रयोग करने की ज्यादा खुली जगह दी। सर्रियलिज़्म, स्पोर्ट्सवियर, बढ़े-चढ़े अनुपात और क्लासिक वॉर्डरोब को नए सिरे से देखने की कोशिशों ने हमारी समीक्षा के दूसरे हिस्से को आकार दिया।
Schiaparelli
Daniel Roseberry ने अपनी कलेक्शन को संरचना और कोमलता के विरोधाभास पर रचा। लेदर और लिनन के रफल्स Elsa Schiaparelli के ऐतिहासिक अटेलियर के पर्दों की याद दिलाते थे, जबकि चटख रंगों और सब्जियों से प्रेरित कढ़ाई में उनके खेलमिजाज़ स्वभाव की झलक थी। खास ध्यान तथाकथित रिवेंज ड्रेसेज़ पर गया, जिनकी प्रेरणा क्लासिक ब्लैक कॉकटेल ड्रेस से ली गई थी। इन लुक्स में स्त्रीत्व और भीतर की ताकत के बीच वही तनाव दिखा, जो Schiaparelli की पहचान बन चुका है।
Loewe
Jack McCollough और Lazaro Hernandez अनपेक्षित आकारों के साथ अपना प्रयोग जारी रखे हुए हैं, और धीरे-धीरे उनके डिज़ाइन ज्यादा सुसंगत होते जा रहे हैं। चौकोर स्कर्ट्स, रैप्ड ड्रेसेज़, कमर पर सिमटे जैकेट्स और बहुत ऊंची कमर वाली नाटकीय ट्राउज़र्स में Loewe के Jonathan Anderson दौर की चंचलता कायम रही।
कलेक्शन में उम्मीद, ताजगी और देखने लायक ऊर्जा थी। अफसोस बस इतना है कि ब्रांड का इतना मजबूत काम अब भी उतनी चर्चा नहीं पाता, जितनी उसे मिलनी चाहिए।
Miu Miu
Miuccia Prada ने Miu Miu की खास सनक और रेट्रो असर के जरिए टेनिस एस्थेटिक को नया रूप दिया। स्पोर्ट्सवियर के तत्व, अनोखे एक्सेसरीज़ और विंटेज से प्रेरित सिल्हूट एक अस्थायी टेनिस कोर्ट पर स्वाभाविक ढंग से साथ आए।
कलेक्शन ने व्यंग्यात्मक स्टाइलिंग और उन पीसेज़ के बीच अच्छा संतुलन बनाया जिन्हें लोग सचमुच पहनना चाहेंगे। बस अंत में आईं ड्रेसेज़ पूरे कॉन्सेप्ट से कुछ अलग-थलग लगीं।
Chanel
Matthieu Blazy, Chanel के पारंपरिक ग्राहकों को छोड़े बिना, उसे नई ताजगी दे रहे हैं। टेलर्ड सूट्स और क्लासिक सिल्हूट्स के साथ रंगीन एंसेंबल्स, मिनीस्कर्ट्स, वॉल्यूमिनस ड्रेसेज़ और स्टेटमेंट एक्सेसरीज़ भी नजर आए।
हालांकि वॉर्डरोब का ज्यादा रूढ़िवादी पक्ष, खासकर ट्वीड ड्रेसेज़, अब भी डिज़ाइनर की कमजोर जगहों में शामिल है। फिर भी नया Chanel ताजा और विज़ुअली रोमांचक लगता है, और उसके बदलते एस्थेटिक को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है।
पेरिस फैशन वीक के बाद खूबसूरत कपड़ों की भरमार जरूर रही, लेकिन हर लुक याद रह जाने वाला नहीं था। आज के डिज़ाइनरों के पास आर्काइव्स, टेक्नोलॉजी और प्रोडक्शन संसाधनों तक लगभग असीम पहुंच है, फिर भी इनमें से कोई भी चीज़ किसी कलेक्शन में व्यक्तित्व की गारंटी नहीं देती। इस सीज़न के सबसे भरोसेमंद शो उन्हीं के रहे, जिन्होंने जोखिम उठाया, गलतियां करने की गुंजाइश रखी और अपना सचमुच अलग नजरिया पेश किया। आखिरकार, फैशन जो हर किसी को खुश करने की कोशिश करता है, वह शायद ही कोई गहरी भावना जगा पाता है।